उस दिन बातों बातों में मैं पूछ बैठा, “तुम्हें मेरी महिला साथी रचनाकारों और पाठिकाओं की टिप्पणी पढ़कर बुरा नहीं लगता!”
“अरे चेतन सुना है तुम्हें कोई साहित्य सम्मान मिलने वाला है.”
“जी चाचाजी.”
“हां भई तुम इतना अच्छा लिखते जो हो! तुम्हारी चाचीजी और बहनें तो तुम्हारी रचनाओं की फैन हैं. कहती हैं नारी विमर्श पर कोई पुरुष तुम जैसा लिख ही नहीं सकता.”
“जी चाचाजी, ये सब तो पाठकों का स्नेह है. आप उन लोगों को मेरी तरफ़ से धन्यवाद कहिएगा.”
“लेकिन ये तो बताओ एक पुरुष होकर तुम्हारे मन में नारी शक्ति के ऐसे विचार आते कैसे हैं?”
“बस आ जाते हैं.”
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यह कहकर मैंने फोन रख दिया. सामने चित्रा चाय लेकर खड़ी थी. उसने मुस्कुराते हुए कहा, “बधाई हो जी! आपकी मेहनत सफल हुई.”
उसकी बांह खींचते हुए मैंने उसे बगल में बैठा लिया तो वो बोली, “अभी समय नहीं है जी. बहुत काम है.”
उसके जाते ही चाचाजी की बात फिर दिमाग़ में गूंजने लगी, “ऐसे विचार तुम्हारे मन में आते कहां से हैं!..”
चित्रा ही तो है मेरी प्रेरणास्त्रोत!
मात्र अठ्ठारह साल की उम्र में मेरे जीवन में आई इस नायिका ने मुझे प्रेम और समर्पण की अद्भुत शक्ति से परिचय करा दिया. मेरे संयुक्त परिवार को इस तरह अपना लिया जैसे यहीं की हो.
परिवार की सेवा सुश्रुषा के लिए चित्रा को गांव छोड़ मैं शहर रहने लगा तो भी उसने अपना दर्द कभी ज़ाहिर नहीं किया.
उस दिन बातों बातों में मैं पूछ बैठा, “तुम्हें मेरी महिला साथी रचनाकारों और पाठिकाओं की टिप्पणी पढ़कर बुरा नहीं लगता!”
तो वो बोली, “आप मेरे हैं और सिर्फ़ मेरे! इस सच को मैं ख़ुद को भूलने नहीं देती. और रही बात आपकी मित्रों और पाठिकाओं की तो वो सब आपकी रचनाओं से प्रेम करती हैं आपसे नहीं.”
उसके उत्तर को सुन विस्मित हो गया था. पता नहीं कैसे मेरे मन की हर उलझन को स्वयं ही समझ जाती है.
मेरी कहानियों की नायिकाएं अक्सर स्वावलंबी होती हैं मेरी चित्रा की तरह… उसी की तरह बहुत मज़बूत और आत्मविश्वासी होती हैं. मेरी चित्रा की तरह ही उन पर भी कभी कोई चारित्रिक दुर्बलता हावी नहीं होती. वे सब भी मेरी चित्रा सी स्वयंसिद्धा होती हैं. कभी चित्रा को परिस्थितियों का रोना रोते नहीं देखा. हर बार इसके घूंघट में छिपे नए रूप से सम्मोहित हो जाता हूं और एक नई कथा लिख देता हूं.
पर इस बार एक नया कथानक लिखूंगा. अपने नायक को थोड़ा हिम्मती बनाऊंगा, जो समाज की बेड़ियों को तोड़ अपनी नायिका को दुनिया के सामने लाएगा!..
– पल्लवी विनोद
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