“नहीं, ऐसे नहीं दे सकता. आपकी एंजायटी की दवा चल रही है. उससे भी नींद आती है. आप ख़ुद को व्यस्त रखा करिए. ख़ुश रहिए . आपकी असली बीमारी तनाव है…”
“अरे, आप फिर से,nअब क्या परेशानी हो गई आपको?”
“आजकल नींद नहीं आती, सिर में भी बहुत दर्द रहता है. कहीं ब्रेन ट्यूमर तो नहीं हो गया?”
“पिछली बार सारी जांच हुई तो थी आपकी! ऐसा कुछ नहीं है.”
“तब आप मुझे नींद की गोलियां ही दे दीजिए. नींद आ जाए तो सिरदर्द भी ठीक हो जाएगा.”
“नहीं, ऐसे नहीं दे सकता. आपकी एंजायटी की दवा चल रही है. उससे भी नींद आती है. आप ख़ुद को व्यस्त रखा करिए. ख़ुश रहिए . आपकी असली बीमारी तनाव है.
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अच्छा आपने वो वीडियो तो देखा होगा, जिसमें दिखाया गया था कि एक ग्लास पानी हाथ में देर तक लिए रहने पर कितनी परेशानियां होती हैं.आप भी चिंता और तनाव को अपने दिमाग़ में भर कर बैठ गई हैं. उसे बाहर फेंककर ख़ुद को आराम दीजिए. आप मेरी बात समझ तो रही हैं ना!”
“जी, लेकिन अगर किसी ने मुझे उस भरे ग्लास को पूरे समय पकड़े रहने की सज़ा दी है तो क्या करूं?”
– पल्लवी विनोद
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