गर्मियों में तेज़ धूप और गर्मी के कारण कई बीमारियां घेर लेती हैं और रबडोमायोलिसिस, डिहाइड्रेशन, हीट सिंकोप, फूड पॉइजनिंग, हीट क्रैम्प्स, टायफाइड, हीट रैश जैसी बीमारियां होने लगती हैं. गर्मियों में भी आप स्वस्थ रहें, इसके लिए ज़रूरी है एक्स्ट्रा केयर. गर्मियों में स्वस्थ रहने के लिए क्या करें, बता रहे हैं डॉ. सी. केतु.
डिहाइड्रेशन
बॉडी में पानी की कमी होने पर हम डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं.
लक्षण
* इसमें अधिक प्यास लगना, उल्टी, दस्त, रूखी त्वचा, होंठों का सूखना, यूरिन कम होना, अधिक पसीना आना, चक्कर आना आदि समस्याएं घेर लेती हैं.
* छोटे बच्चों में यदि सुस्ती, अधिक चिड़चिड़ापन, रोते समय आंसू का न निकलना, डायपर अधिक गीला न होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह डिहाइड्रेशन हो सकता है.
कारण
* दस्त, उल्टी, डायरिया होना.
* अधिक गर्मी व तेज़ बुखार की वजह से बहुत अधिक पसीना होना.
* कम पानी पीना.
* डाईयूरेटिक मेडिसिन का इस्तेमाल करना.
उपचार
* ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) लेना सबसे बेहतरीन उपाय है.
* पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं.
* फ्रूट जूस, नारियल पानी व नींबू पानी लें.
* एक ग्लास पानी में चुटकीभर नमक, दो टीस्पून नींबू का रस व तीन टीस्पून शक्कर मिलाकर पीएं.
सावधानी
* समर के मौसम में दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी अवश्य पीएं.
* जब भी धूप में बाहर जाएं तब पानी पीकर ही निकलें.
* एक्सरसाइज़ या कोई हार्ड वर्क आउट करते समय इलेक्ट्रोलाइट लिक्विड ज़रूर लें.
हेल्थ अलर्ट: यदि चक्कर अधिक आ रहा हो, बेहोशी सी हो रही हो या फिर चौबीस घंटे से अधिक समय तक दस्त-उल्टी हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
हीट सिंकोप
इस बीमारी में बॉडी में अधिक गर्मी होने और डिहाइड्रेशन की वजह से पैरों में खून जमा होने के कारण चक्कर सा आने लगता है और बेहोशी भी होने लगती है.
लक्षण
* त्वचा का रंग पीला पड़ना.
* थकान व चक्कर आना.
* कमज़ोरी होने के साथ-साथ अचानक बेहोशी होना.
कारण
* इस स्थिति में गर्मी की वजह से जब खून का बहाव पैरों की ओर बढ़ने लगता है तब ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है.
* जिन लोगों को गर्मी सहन करने की आदत नहीं होती या फिर जो फिजिकली बीमार हैं, उन्हें यह समस्या अधिक होती है.
उपचार
* पीड़ित को छायादार ठंडी जगह पर लिटाएं.
* दोनों पैरों को ऊपर की तरफ़ उठाएं, जिससे खून का बहाव दिल की तरफ़ हो सके.
* इलेक्ट्रोलाइट लिक्विड या पानी धीरे-धीरे पिलाएं.
हेल्थ अलर्टः ध्यान रहे बेहोशी लंबे समय तक बनी रहे, तो हीट स्ट्रोक भी हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टरी सलाह लें.
फूड पॉइज़निंग
अक्सर दूषित भोजन या पानी के सेवन से वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट्स पाचन तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे फूड पॉयजनिंग हो जाता है.
लक्षण
* आमतौर पर इसमें पेटदर्द, मतली होना, दस्त, उल्टी, बुखार, पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं होती हैं.
* सीरियस फूड पॉयजनिंग में डिहाइड्रेशन, खूनी दस्त, बार-बार उल्टी होना, 102 डिग्री से अधिक बुखार होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं.
कारण
* दूषित पानी या भोजन, जिसमें विषाक्त पदार्थ या अन्य रोगाणु होते हैं, का सेवन करने से फूड पॉयजनिंग होती है.
* हर साल ऑस्ट्रेलिया में तक़रीबन 41 लाख केस फूड पॉयजनिंग के आते हैं.
* अमेरिका में हर साल अंदाज़न हर छह में से एक व्यक्ति हानिकारक वायरस, बैक्टीरिया, फूड पॉयजनिंग का शिकार होता है.
उपचार
* हल्का और सादा भोजन करें, साथ में दही लें.
* अत्यधिक पानी के साथ-साथ ओआरएस व तरल चीज़ें अधिक लें.
* गुनगुना नींबू पानी पीएं. यदि इसमें शहद मिला दें तो और भी बेहतर है.
* ख़ुद को हाइड्रेट रखें और आराम करें.
* ओटमील, मैश किए हुए आलू व केले लें.
* अदरक की चाय पीएं.
* डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें.
सावधानी
* अल्कोहल व कैफीन से दूर रहें.
* अधिक तीखा व मसालेदार भोजन न करें.
हेल्थ अलर्टः फैटी या तले-मसालेदार फूड का सेवन न करें. एक्सपायरी डेट वाले व फ्रीजर से बाहर रखे हुए ठंडे पैक्ड फूड न ख़रीदें.
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रबडोमायोलिसिस
इस बीमारी में मसल्स के टिश्यू नष्ट होने लगते हैं और उनका प्रोटीन ब्लड में मिल जाता है. इसके कारण किडनी ख़राब होने की भी संभावना रहती है.
लक्षण
* मसल्स में दर्द व अकड़न होना.
* मटमैले रंग का यूरिन होना.
* थकान व कमज़ोरी महसूस होना.
* शरीर में पानी की कमी.
कारण
* क्षमता से अधिक एक्सरसाइज़ करना.
* बिना किसी तैयारी के अधिक वर्कआउट करना या हॉट टेंप्रेचर में वर्कआउट करना.
* किसी एक्सीडेंट या फिर गिरने से हुआ घाव.
* ऑपरेशन के दरमियान एक पोज़ीशन में लंबे समय तक लेटे रहना.
* स्टेरॉयड का ग़लत इस्तेमाल.
* अल्कोहल, दवाएं अधिक लेना.
उपचार
* इसका तुरंत इलाज करवाना बेहद ज़रूरी है. इसमें बॉडी में पानी की कमी होने व किडनी को हेल्दी रखने के लिए नसों के ज़रिए लिक्विड दिए जाते हैं.
* इलेक्ट्रोलाइट्स द्वारा ब्लड में पोटैशियम के लेवल को कंट्रोल किया जाता है.
सावधानी
* एक्सरसाइज़ के समय व बाद पर्याप्त मात्रा में पानी ज़रूर पीएं.
* अपने शरीर के सामर्थ्य से अधिक वर्कआउट न करें. यानी जितनी आपकी क्षमता हो उतनी ही कसरत करें.
* समर में अधिक वर्कआउट न करें.
हेल्थ अलर्टः इसमें यदि किडनी ठीक तरह से फंक्शन नहीं करती, तो डायलिसिस की भी ज़रूरत पड़ जाती है.
हीट क्रैम्प्स
समर सीजन में अधिक एक्सरसाइज़ करने पर बॉडी में पसीने के कारण पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिससे मसल्स में दर्दनाक ऐंठन होने लगती है. यह विशेषकर पैरों, बांहों व पेट में अचानक होती है.
लक्षण
* मसल्स में तेज़ दर्द व अकड़न होना.
* अचानक असहनीय दर्द होना.
* जहां पर क्रैम्प्स हो रहा है, वहां त्वचा का सुन्न व ठंडा हो जाना.
कारण
* यदि हाई टेम्प्रेचर में बहुत अधिक मेहनत करते हैं तब यह समस्या अधिक होती है.
* डिहाइड्रेशन व पसीने के साथ पोटैशियम व सोडियम की कमी होने पर भी ऐसा होता है.
उपचार
* सबसे पहले तो किसी ठंडी जगह पर आराम करें.
* मसल्स को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें. हल्के हाथों से मसाज करें.
* पर्याप्त मात्रा में लिक्विड लें. इलेक्ट्रोलाइट युक्त पानी, स्पोर्ट्स ड्रिंक लें.
* क्रैम्प्स वाली जगह पर ठंडी गीली पट्टी रखें.
सावधानी
* गर्मी या उमस वाले वातावरण में लगातार काम करने से बचें. बीच-बीच में ब्रेक ले लें या फिर थोड़ा आराम कर लें.
* हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े पहनें.
हेल्थ अलर्ट: यदि एक घंटे से अधिक समय तक क्रैम्प्स बना रहे या फिर आप हार्ट पेंशट हैं, तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें.
टाइफाइड
यह साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है. टाइफाइड बुखार एक जानलेवा बीमारी भी है.
लक्षण
* इसमें बुखार धीरे-धीरे बढ़ता है और कुछ दिनों में बहुत तेज़ हो जाता है, जो लगातार कई दिनों तक बना रह सकता है.
* यानी कई दिनों तक तेज़ बुखार, लगातार सिरदर्द, पेटदर्द, कब्ज़ होना व अत्यधिक कमज़ोरी. भूख न लगना, गले में खराश, सूखी खांसी, बॉडी में रैशेज होना.
कारण
* प्रायः सफ़ाई की कमी और दूषित भोजन-पानी से यह होता है.
* इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यानी उनके द्वारा परोसा गया भोजन करने से भी होता है.
उपचार
* टाइफाइड में एंटीबायोटिक मेडिसिन का पूरा कोर्स करना ज़रूरी होता है.
* सादा, हल्का व सुपाच्य भोजन लें, जैसे- खिचड़ी, सूप, दलिया आदि.
* उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीएं.
सावधानी
* स्ट्रीट फूड बिल्कुल भी न खाएं.
* भोजन से पहले और बाद में हाथ ज़रूर धोएं.
* जहां पर अधिक रिस्क हो यदि अति आवश्यक कारणों से वहां जाना है, तो टाइफाइड के टीके ज़रूर लगाएं.
हेल्थ अलर्ट: यदि टाइफाइड का समय रहते इलाज न किया जाए, तो इससे आंतों में छेद जैसी गंभीर समस्या हो सकती है.
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हीट रैश
समर में अत्यधिक गर्मी व उमस के कारण पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, जिससे शरीर में लाल-लाल दाने यानी घमौरियां हो जाती हैं. यह अधिकतर गर्दन, छाती, कांख पर होती हैं.
लक्षण
छोटे-छोटे लाल दाने, खुजली, जलन व कभी-कभी सूजन वाले दाने होना.
कारण
अधिक पसीना व त्वचा के रोमछिद्रों के बंद होने से हीट रैश होने लगते हैं.
उपचार
* सूती कपड़े पहनें.
* स्किन को ठंडा रखें.
* दिनभर में दो बार ठंडे पानी से बाथ लें. नहाने के पानी में ओटमील का पेस्ट मिलाकर नहाएं. इससे खुजली में आराम मिलेगा.
* एलोवेरा जेल से जलन कम होगी.
* चंदन लगाने से त्वचा को ठंडक मिलेगी.
सावधानी
* सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें.
* ऐसी एक्सरसाइज़ न करें, जिसमें अधिक पसीना आए.
* स्किन को सूखा रखें.
हेल्थ अलर्ट: यदि दाने में मवाद भर जाए, अधिक दर्द या बुखार हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें.
- ऊषा गुप्ता

